छोड़ो यूँ बात बात पर खफा हो न
छोड़ो यूँ बात बात पर खफा हो न
अज़ी आपको मेरी कसम ज़रा मुस्कुरा दो न
मैं चाहता हूँ रहूं हर पल तुम्हारे पास
मुझे अपनी सांसो में तुम बसा लो न
बिखर जाएगी खूशबू फ़ज़ाओं में हर सू
ज़ुल्फो को अपने तुम ज़रा लहरा दो न
पूरी हो जाएगी आज मेरी हर एक तमन्ना
मुझे हम सफ़र अपना तुम बना लो न
हाले दिल कहने से क्यों डरते हो ऐ ‘सागर’
प्यार है तो जाकर उनसे बतला दो न
Hmmm! to aap yaha bhi likhte hai … nice to see u here
!! Tahe care Dost from —-> http://www.just4dosti.com
Tosha - अगस्त 3, 2009 को 5:01 पूर्वाह्न पर |
Aapka bahut bahut shukriya!
sarfaraz sagar - दिसम्बर 26, 2009 को 6:16 अपराह्न पर |